श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 59: ब्रह्माजीके नीतिशास्त्रका तथा राजा पृथुके चरित्रका वर्णन  »  श्लोक 102
 
 
श्लोक  12.59.102 
यन्मां भवन्तो वक्ष्यन्ति कार्यमर्थसमन्वितम्।
तदहं वै करिष्यामि नात्र कार्या विचारणा॥ १०२॥
 
 
अनुवाद
आप लोग मुझे जो भी उद्देश्यपूर्ण कार्य करने का आदेश देंगे, मैं उसे अवश्य पूरा करूँगा। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए।॥102॥
 
'Whatever purposeful work you all order me to do, I will certainly complete it. There should be no second thoughts about it.'॥ 102॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)