श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 58: भीष्मद्वारा राज्यरक्षाके साधनोंका वर्णन तथा संध्याके समय युधिष्ठिर आदिका विदा होना और रास्तेमें स्नान-संध्यादि नित्यकर्मसे निवृत्त होकर हस्तिनापुरमें प्रवेश  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  12.58.30 
दृषद्वतीं चाप्यवगाह्य सुव्रता:
कृतोदकार्था: कृतजप्यमङ्गला:।
उपास्य संध्यां विधिवत् परंतपा-
स्तत: पुरं ते विविशुर्गजाह्वयम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् दृषद्वती नदी में स्नान करके तथा उत्तम व्रत करके शत्रुओं से संतप्त हुए वे वीर योद्धा संध्या, तर्पण, जप आदि शुभ कर्म करके वहाँ से हस्तिनापुर को आये॥30॥
 
Then, after taking a bath in the Drishadwati river and observing a good fast, those brave warriors who were angry with their enemies, after performing the auspicious rituals like sandhya, tarpan, chanting etc., came from there to Hastinapura. 30॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि युधिष्ठिरादिस्वस्थानगमनेऽष्टपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें युधिष्ठिर आदिका अपने निवासस्थानको प्रस्थानविषयक अट्ठावनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५८॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)