श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 58: भीष्मद्वारा राज्यरक्षाके साधनोंका वर्णन तथा संध्याके समय युधिष्ठिर आदिका विदा होना और रास्तेमें स्नान-संध्यादि नित्यकर्मसे निवृत्त होकर हस्तिनापुरमें प्रवेश  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  12.58.29 
ततो द्विजातीनभिवाद्य केशव:
कृपश्च ते चैव युधिष्ठिरादय:।
प्रदक्षिणीकृत्य महानदीसुतं
ततो रथानारुरुहुर्मुदान्विता:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् भगवान श्रीकृष्ण, कृपाचार्य और युधिष्ठिर आदि ने ब्राह्मणों को प्रणाम करके महानदी गंगा की परिक्रमा की और प्रसन्नतापूर्वक अपने रथों पर सवार हुए॥29॥
 
After that, after paying obeisance to the Brahmins, Lord Shri Krishna, Kripacharya and Yudhishthir etc. circumambulated the son of Bhishmaji of Mahanadi Ganga. Then they happily mounted their chariots. 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)