न च शत्रुरवज्ञेयो दुर्बलोऽपि बलीयसा।
अल्पोऽपि हि दहत्यग्निर्विषमल्पं हिनस्ति च॥ १७॥
अनुवाद
बलवान पुरुष को चाहिए कि वह दुर्बल शत्रु की भी कभी उपेक्षा न करे अर्थात् उसे छोटा समझकर उसके प्रति कभी उदासीनता न दिखाए; क्योंकि अग्नि की मात्रा कम होने पर भी वह जलाती है और विष की मात्रा कम होने पर भी वह मार डालती है॥17॥
‘A strong man should never disregard even a weak enemy i.e. he should never show indifference towards him considering him small; because even if the amount of fire is small, it burns and even if the amount of poison is less, it kills.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥