श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 58: भीष्मद्वारा राज्यरक्षाके साधनोंका वर्णन तथा संध्याके समय युधिष्ठिर आदिका विदा होना और रास्तेमें स्नान-संध्यादि नित्यकर्मसे निवृत्त होकर हस्तिनापुरमें प्रवेश  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.58.16 
उत्थानहीनो राजा हि बुद्धिमानपि नित्यश:।
प्रधर्षणीय: शत्रूणां भुजङ्ग इव निर्विष:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जो राजा उद्योग से रहित है, वह बुद्धिमान होने पर भी विषहीन सर्प के समान है, जो अपने शत्रुओं से सदैव पराजित होता रहता है॥16॥
 
'A king who is devoid of industry, though intelligent, is like a snake without poison, always getting defeated by his enemies.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)