श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 58: भीष्मद्वारा राज्यरक्षाके साधनोंका वर्णन तथा संध्याके समय युधिष्ठिर आदिका विदा होना और रास्तेमें स्नान-संध्यादि नित्यकर्मसे निवृत्त होकर हस्तिनापुरमें प्रवेश  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.58.13 
उत्थानं हि नरेन्द्राणां बृहस्पतिरभाषत।
राजधर्मस्य तन्मूलं श्लोकांश्चात्र निबोध मे॥ १३॥
 
 
अनुवाद
बृहस्पति ने राजाओं के लिए परिश्रम का महत्व प्रतिपादित किया है। परिश्रम ही राजधर्म का मूल है। मैं तुम्हें इसी विषय से संबंधित श्लोक सुनाता हूँ, कृपया सुनो॥13॥
 
Brihaspati has propounded the importance of hard work for kings. Hard work is the root of Rajdharma. I am telling you the verses related to this topic, please listen.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)