श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 58: भीष्मद्वारा राज्यरक्षाके साधनोंका वर्णन तथा संध्याके समय युधिष्ठिर आदिका विदा होना और रास्तेमें स्नान-संध्यादि नित्यकर्मसे निवृत्त होकर हस्तिनापुरमें प्रवेश  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.58.1 
भीष्म उवाच
एतत् ते राजधर्माणां नवनीतं युधिष्ठिर।
बृहस्पतिर्हि भगवान् न्याय्यं धर्मं प्रशंसति॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं- युधिष्ठिर! मैंने जो कुछ तुमसे कहा है, वह राजधर्मरूपी दूध का मक्खन है। भगवान बृहस्पति इसी न्यायधर्म की प्रशंसा करते हैं॥ 1॥
 
Bhishmaji says- Yudhishthira! Whatever I have told you is the butter of the milk of the royal religion. Lord Brihaspati praises this just religion.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)