Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.57.5: राज्य के सात अंग हैं- राजा, मंत्री, मित्र, कोष, देश, किला और सेना। जो कोई राज्य के इन सात अंगों के विपरीत आचरण करता है, चाहे वह गुरु हो या मित्र, वह मारे जाने योग्य है। ॥5॥ | mahabharat अध्याय 12.57: राजाके धर्मानुकूल नीतिपूर्ण बर्तावका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सप्ताङ्गस्य च राज्यस्य विपरीतं य आचरेत्।
गुरुर्वा यदि वा मित्रं प्रतिहन्तव्य एव स:॥ ५॥
अनुवाद
राज्य के सात अंग हैं- राजा, मंत्री, मित्र, कोष, देश, किला और सेना। जो कोई राज्य के इन सात अंगों के विपरीत आचरण करता है, चाहे वह गुरु हो या मित्र, वह मारे जाने योग्य है। ॥5॥
There are seven parts of a kingdom- the king, the minister, the friend, the treasury, the country, the fort and the army. Whoever behaves contrary to these seven parts of the kingdom, be it a Guru or a friend, is worthy of being killed. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥