श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 57: राजाके धर्मानुकूल नीतिपूर्ण बर्तावका वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.57.4 
तदेतन्नरशार्दूल हृदि त्वं कर्तुमर्हसि।
संधेयानभिसंधत्स्व विरोध्यांश्च विरोधय॥ ४॥
 
 
अनुवाद
इसलिए हे पुरुषश्रेष्ठ! इस बात का ध्यान रखो कि जो संधि करने के योग्य हैं, उनके साथ संधि करो और जो विरोध करने के योग्य हैं, उनका डटकर विरोध करो। ॥4॥
 
Therefore, O best of men, keep this in mind. Make a treaty with those who are capable of making a treaty and oppose strongly those who deserve to be opposed. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)