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mahabharat 12.57.39: केवल वही राजा शासन करने का अधिकारी है जिसके गुप्तचर, गुप्त विचार, निश्चित कार्य और कर्म शत्रुओं को ज्ञात न हो सकें।   |   mahabharat अध्याय 12.57: राजाके धर्मानुकूल नीतिपूर्ण बर्तावका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 57: राजाके धर्मानुकूल नीतिपूर्ण बर्तावका वर्णन  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  12.57.39 
यस्य चाराश्च मन्त्राश्च नित्यं चैव कृताकृता:।
न ज्ञायन्ते हि रिपुभि: स राजा राज्यमर्हति॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
केवल वही राजा शासन करने का अधिकारी है जिसके गुप्तचर, गुप्त विचार, निश्चित कार्य और कर्म शत्रुओं को ज्ञात न हो सकें।
 
Only that king deserves to rule whose spies, secret thoughts, decided actions and deeds cannot be known by the enemies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)