Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.57.38: जो ज्ञान और विद्वानों का आदर करता है, जो शास्त्रों के विषयों को समझने और दूसरों का उपकार करने में लगा रहता है, जो धर्म के मार्ग पर चलता है और जो स्वार्थ का त्याग कर देता है, वही राज्य करने के योग्य राजा माना जाता है ॥38॥ | mahabharat अध्याय 12.57: राजाके धर्मानुकूल नीतिपूर्ण बर्तावका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
य: सत्करोति ज्ञानानि ज्ञेये परहिते रत:।
सतां वर्त्मानुगस्त्यागी स राजा राज्यमर्हति॥ ३८॥
अनुवाद
जो ज्ञान और विद्वानों का आदर करता है, जो शास्त्रों के विषयों को समझने और दूसरों का उपकार करने में लगा रहता है, जो धर्म के मार्ग पर चलता है और जो स्वार्थ का त्याग कर देता है, वही राज्य करने के योग्य राजा माना जाता है ॥38॥
He who respects knowledge and the learned, who is engaged in understanding the subjects of the scriptures and in doing good for others, who walks on the path of the virtuous and who renounces selfishness, is considered a king fit to rule a kingdom. ॥ 38॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥