Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.57.35-36: जिस राजा के राज्य में प्रजा रहती है, जो नियमानुसार रक्षित और पोषित होती है, अपने-अपने कर्मों में तत्पर रहती है, शरीर में आसक्ति नहीं रखती, इन्द्रियों को वश में रखती है, अपने वश में रहती है, शिक्षा देने और ग्रहण करने में समर्थ है, आज्ञा का पालन करने वाली है, झगड़े-विवाद से दूर रहती है और दान देने में रुचि रखती है, वही राजा श्रेष्ठ है ॥ 35-36॥ | mahabharat अध्याय 12.57: राजाके धर्मानुकूल नीतिपूर्ण बर्तावका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स्वकर्मनिरता यस्य जना विषयवासिन:।
असंघातरता दान्ता: पाल्यमाना यथाविधि॥ ३५॥
वश्या नेया विधेयाश्च न च संघर्षशीलिन:।
विषये दानरुचयो नरा यस्य स पार्थिव:॥ ३६॥
अनुवाद
जिस राजा के राज्य में प्रजा रहती है, जो नियमानुसार रक्षित और पोषित होती है, अपने-अपने कर्मों में तत्पर रहती है, शरीर में आसक्ति नहीं रखती, इन्द्रियों को वश में रखती है, अपने वश में रहती है, शिक्षा देने और ग्रहण करने में समर्थ है, आज्ञा का पालन करने वाली है, झगड़े-विवाद से दूर रहती है और दान देने में रुचि रखती है, वही राजा श्रेष्ठ है ॥ 35-36॥
The king in whose kingdom the people live, who are protected and nurtured according to the rules, are engaged in their respective duties, have no attachment to the body, have controlled senses, are under his control, are capable of giving and receiving education, obey orders, stay away from quarrels and disputes and are interested in giving donations, is the best king. ॥ 35-36॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥