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mahabharat 12.57.34: जिसके राज्य या नगर में प्रजा अपना धन नहीं छिपाती (क्योंकि चोरों का भय नहीं रहता) तथा न्याय और अन्याय को समझती है, वह राजा सब राजाओं में श्रेष्ठ है ॥34॥   |   mahabharat अध्याय 12.57: राजाके धर्मानुकूल नीतिपूर्ण बर्तावका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 57: राजाके धर्मानुकूल नीतिपूर्ण बर्तावका वर्णन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  12.57.34 
अगूढविभवा यस्य पौरा राष्ट्रनिवासिन:।
नयापनयवेत्तार: स राजा राजसत्तम:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
जिसके राज्य या नगर में प्रजा अपना धन नहीं छिपाती (क्योंकि चोरों का भय नहीं रहता) तथा न्याय और अन्याय को समझती है, वह राजा सब राजाओं में श्रेष्ठ है ॥34॥
 
The king in whose kingdom or city the people do not hide their wealth (due to no fear of thieves) and understand what is justice and what is injustice, is the best of all kings. ॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)