Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.57.30-32: जो राजा बुद्धिमान, त्यागी, शत्रुओं की दुर्बलता जानने में तत्पर, देखने में सुन्दर, सभी जातियों के न्याय-अन्याय को समझने वाला, शीघ्र कार्य करने में समर्थ, क्रोध पर विजय पाने वाला, आश्रितों पर दया करने वाला, दयालु, मृदु स्वभाव वाला, उद्योगी, परिश्रमी और आत्म-प्रशंसा से रहित हो, जो राजा प्रारम्भ किए गए सभी कार्यों को सुन्दरता से सम्पन्न होते देखता हो, वह सभी राजाओं में श्रेष्ठ है। | mahabharat अध्याय 12.57: राजाके धर्मानुकूल नीतिपूर्ण बर्तावका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो राजा बुद्धिमान, त्यागी, शत्रुओं की दुर्बलता जानने में तत्पर, देखने में सुन्दर, सभी जातियों के न्याय-अन्याय को समझने वाला, शीघ्र कार्य करने में समर्थ, क्रोध पर विजय पाने वाला, आश्रितों पर दया करने वाला, दयालु, मृदु स्वभाव वाला, उद्योगी, परिश्रमी और आत्म-प्रशंसा से रहित हो, जो राजा प्रारम्भ किए गए सभी कार्यों को सुन्दरता से सम्पन्न होते देखता हो, वह सभी राजाओं में श्रेष्ठ है।
The king who is intelligent, self-sacrificing, quick in trying to know the weaknesses of his enemies, beautiful to look at, understanding the justice and injustice of all the castes, able to act quickly, victorious over anger, kind to his dependents, kind-hearted, soft-natured, industrious, hard-working and free from self-praise, the king who sees all the works started being completed beautifully, is the best among all the kings.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥