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mahabharat 12.57.29: जो क्रोध से रहित है, जो विकारों से दूर रहता है, जिसका दण्ड कठोर नहीं है और जिसने अपनी इन्द्रियों को जीत लिया है, वह राजा हिमालय के समान समस्त प्राणियों का विश्वसनीय हो जाता है ॥29॥   |   mahabharat अध्याय 12.57: राजाके धर्मानुकूल नीतिपूर्ण बर्तावका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 57: राजाके धर्मानुकूल नीतिपूर्ण बर्तावका वर्णन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  12.57.29 
अक्रोधनो ह्यव्यसनी मृदुदण्डो जितेन्द्रिय:।
राजा भवति भूतानां विश्वास्यो हिमवानिव॥ २९॥
 
 
अनुवाद
जो क्रोध से रहित है, जो विकारों से दूर रहता है, जिसका दण्ड कठोर नहीं है और जिसने अपनी इन्द्रियों को जीत लिया है, वह राजा हिमालय के समान समस्त प्राणियों का विश्वसनीय हो जाता है ॥29॥
 
He who is free from anger, who stays away from vices, whose punishment is not harsh and who has conquered his senses, he becomes trusted by all creatures like King Himalaya. ॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)