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mahabharat 12.57.26: राजा को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से उनके साथ समान व्यवहार करना चाहिए। जो राजा ऐसा करता है, उसे इस संसार में कभी कोई कष्ट नहीं होता।॥26॥   |   mahabharat अध्याय 12.57: राजाके धर्मानुकूल नीतिपूर्ण बर्तावका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 57: राजाके धर्मानुकूल नीतिपूर्ण बर्तावका वर्णन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  12.57.26 
प्रत्यक्षा च परोक्षा च वृत्तिश्चास्य भवेत् समा।
एवं कुर्वन् नरेन्द्रोऽपि न खेदमिह विन्दति॥ २६॥
 
 
अनुवाद
राजा को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से उनके साथ समान व्यवहार करना चाहिए। जो राजा ऐसा करता है, उसे इस संसार में कभी कोई कष्ट नहीं होता।॥26॥
 
The king should treat them equally, directly or indirectly. A king who does this never faces any trouble in this world.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)