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mahabharat 12.57.23-25: जो वीर और भक्त हैं, जो विरोधियों से पराजित नहीं हो सकते, जो कुलीन, स्वस्थ और विनम्र हैं तथा जिनका संबंध शिष्ट लोगों से है, जो अपने आत्मसम्मान की रक्षा करते हुए कभी दूसरों का अपमान नहीं करते, जो धार्मिक, विद्वान, लोक व्यवहार के ज्ञाता और शत्रुओं की गतिविधियों पर नजर रखने वाले, साधुता से युक्त और पर्वत के समान दृढ़ निश्चयी हैं, ऐसे लोगों को राजा सदैव अपना सहायक बनाए और उन्हें धन से पुरस्कृत करे, उन्हें अपने समान ही भोग-सुविधाएं प्रदान करे, केवल राजछत्र धारण करने और सबको आज्ञा देने में - केवल इन दो बातों में ही वह उन सहायकों से श्रेष्ठ हो।   |   mahabharat अध्याय 12.57: राजाके धर्मानुकूल नीतिपूर्ण बर्तावका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 57: राजाके धर्मानुकूल नीतिपूर्ण बर्तावका वर्णन  »  श्लोक 23-25
 
 
श्लोक  12.57.23-25 
शूरान् भक्तानसंहार्यान् कुले जातानरोगिण:।
शिष्टान् शिष्टाभिसम्बन्धान्मानिनोऽनवमानिन:॥ २३॥
विद्याविदो लोकविद: परलोकान्ववेक्षकान्।
धर्मे च निरतान् साधूनचलानचलानिव॥ २४॥
सहायान् सततं कुर्याद् राजा भूतिपुरष्कृत:।
तैश्च तुल्यो भवेद् भोगैश्छत्रमात्राज्ञयाधिक:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
जो वीर और भक्त हैं, जो विरोधियों से पराजित नहीं हो सकते, जो कुलीन, स्वस्थ और विनम्र हैं तथा जिनका संबंध शिष्ट लोगों से है, जो अपने आत्मसम्मान की रक्षा करते हुए कभी दूसरों का अपमान नहीं करते, जो धार्मिक, विद्वान, लोक व्यवहार के ज्ञाता और शत्रुओं की गतिविधियों पर नजर रखने वाले, साधुता से युक्त और पर्वत के समान दृढ़ निश्चयी हैं, ऐसे लोगों को राजा सदैव अपना सहायक बनाए और उन्हें धन से पुरस्कृत करे, उन्हें अपने समान ही भोग-सुविधाएं प्रदान करे, केवल राजछत्र धारण करने और सबको आज्ञा देने में - केवल इन दो बातों में ही वह उन सहायकों से श्रेष्ठ हो।
 
Those who are brave and devoted, who cannot be defeated by the opponents, who are noble, healthy and courteous and who have relations with courteous people, who never insult others while protecting their self-respect, who are religious, learned, knower of social behavior and keep an eye on the activities of the enemies, who are full of saintliness and who are as steadfast as mountains, the king should always make such people his assistants and reward them with wealth. He should provide them with the same facilities of enjoyment as himself, only in wearing the royal umbrella and giving orders to everyone - he should be better than those assistants in these two things only. 23-25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)