Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.57.22: दुष्टों पर प्रहार करना चाहिए, दानशील होना चाहिए, मन को वश में रखना चाहिए, सुख साधनों से युक्त रहना चाहिए, समय-समय पर धन का दान और उपभोग करना चाहिए तथा सदैव शुद्ध एवं सदाचारी रहना चाहिए ॥22॥ | mahabharat अध्याय 12.57: राजाके धर्मानुकूल नीतिपूर्ण बर्तावका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स्वयं प्रहर्ता दाता च वश्यात्मा रम्यसाधन:।
काले दाता च भोक्ता च शुद्धाचारस्तथैव च॥ २२॥
अनुवाद
दुष्टों पर प्रहार करना चाहिए, दानशील होना चाहिए, मन को वश में रखना चाहिए, सुख साधनों से युक्त रहना चाहिए, समय-समय पर धन का दान और उपभोग करना चाहिए तथा सदैव शुद्ध एवं सदाचारी रहना चाहिए ॥22॥
One must attack the wicked, be charitable, control the mind, be equipped with pleasant means, donate and consume wealth from time to time and remain pure and virtuous all the time. ॥22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥