Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.57.18: राजा को चाहिए कि वह सदैव अपने कोष को पूर्ण रखने का प्रयत्न करे। न्याय करने में उसे यमराज के समान और धन संचय करने में कुबेर के समान होना चाहिए। उसे स्थान, वृद्धि और क्षय के कारण बनने वाली दस प्रकार की वस्तुओं का सदैव ज्ञान रखना चाहिए।॥18॥ | mahabharat अध्याय 12.57: राजाके धर्मानुकूल नीतिपूर्ण बर्तावका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कोशस्योपार्जनरतिर्यमवैश्रवणोपम:।
वेत्ता च दशवर्गस्य स्थानवृद्धिक्षयात्मन:॥ १८॥
अनुवाद
राजा को चाहिए कि वह सदैव अपने कोष को पूर्ण रखने का प्रयत्न करे। न्याय करने में उसे यमराज के समान और धन संचय करने में कुबेर के समान होना चाहिए। उसे स्थान, वृद्धि और क्षय के कारण बनने वाली दस प्रकार की वस्तुओं का सदैव ज्ञान रखना चाहिए।॥18॥
It is appropriate for the king to always try to keep his treasury full. He should be like Yamaraja in dispensing justice and like Kubera in accumulating wealth. He should always have knowledge of the ten categories of things that are responsible for place, growth and decay.॥18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥