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mahabharat 12.57.15: राजा को चारों वर्णों के धर्मों की रक्षा करनी चाहिए। अपनी प्रजा को धर्म-संकट से बचाना राजाओं का सनातन कर्तव्य है ॥15॥   |   mahabharat अध्याय 12.57: राजाके धर्मानुकूल नीतिपूर्ण बर्तावका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 57: राजाके धर्मानुकूल नीतिपूर्ण बर्तावका वर्णन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.57.15 
चातुर्वर्ण्यस्य धर्माश्च रक्षितव्या महीक्षिता।
धर्मसंकररक्षा च राज्ञां धर्म: सनातन:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
राजा को चारों वर्णों के धर्मों की रक्षा करनी चाहिए। अपनी प्रजा को धर्म-संकट से बचाना राजाओं का सनातन कर्तव्य है ॥15॥
 
The king must protect the religions of all the four castes. It is the eternal duty of kings to protect their subjects from religious mixing. ॥15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)