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mahabharat 12.57.11: अतः इस संसार में प्रजा को सुखी रखना राजाओं का सनातन धर्म है। सत्य की रक्षा और व्यवहार में सरलता रखना राजधर्म है। ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 12.57: राजाके धर्मानुकूल नीतिपूर्ण बर्तावका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 57: राजाके धर्मानुकूल नीतिपूर्ण बर्तावका वर्णन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.57.11 
लोकरञ्जनमेवात्र राज्ञां धर्म: सनातन:।
सत्यस्य रक्षणं चैव व्यवहारस्य चार्जवम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
अतः इस संसार में प्रजा को सुखी रखना राजाओं का सनातन धर्म है। सत्य की रक्षा और व्यवहार में सरलता रखना राजधर्म है। ॥11॥
 
Therefore, in this world, keeping the subjects happy is the eternal duty of kings. Protecting the truth and simplicity in behavior is the royal duty. ॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)