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mahabharat 12.57.10: उद्दालक ऋषि ने अपने प्रिय पुत्र महातपस्वी श्वेतकेतु को केवल इसलिए त्याग दिया क्योंकि वह ब्राह्मणों के साथ अधर्म और बेईमानी का व्यवहार करता था ॥10॥   |   mahabharat अध्याय 12.57: राजाके धर्मानुकूल नीतिपूर्ण बर्तावका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.57.10 
ऋषिणोद्दालकेनापि श्वेतकेतुर्महातपा:।
मिथ्या विप्रानुपचरन् संत्यक्तो दयित: सुत:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
उद्दालक ऋषि ने अपने प्रिय पुत्र महातपस्वी श्वेतकेतु को केवल इसलिए त्याग दिया क्योंकि वह ब्राह्मणों के साथ अधर्म और बेईमानी का व्यवहार करता था ॥10॥
 
The sage Uddalaka abandoned his beloved son, the great ascetic Swetaketu, only because he behaved dishonestly and dishonestly with the brahmins.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)