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mahabharat 12.56.60: जैसे लोग डोरी से बँधे हुए पक्षी के साथ खेलते हैं, वैसे ही वे भी राजा के साथ खेलना चाहते हैं और आम लोगों से कहते रहते हैं कि 'राजा हमारा दास है।' ॥60॥   |   mahabharat अध्याय 12.56: युधिष्ठिरके पूछनेपर भीष्मके द्वारा राजधर्मका वर्णन, राजाके लिये पुरुषार्थ और सत्यकी आवश्यकता, ब्राह्मणोंकी अदण्डनीयता तथा राजाकी परिहासशीलता और मृदुतासे प्रकट होनेवाले दोष   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 56: युधिष्ठिरके पूछनेपर भीष्मके द्वारा राजधर्मका वर्णन, राजाके लिये पुरुषार्थ और सत्यकी आवश्यकता, ब्राह्मणोंकी अदण्डनीयता तथा राजाकी परिहासशीलता और मृदुतासे प्रकट होनेवाले दोष  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  12.56.60 
क्रीडितुं तेन चेच्छन्ति ससूत्रेणेव पक्षिणा।
अस्मत्प्रणेयो राजेति लोकांश्चैव वदन्त्युत॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
जैसे लोग डोरी से बँधे हुए पक्षी के साथ खेलते हैं, वैसे ही वे भी राजा के साथ खेलना चाहते हैं और आम लोगों से कहते रहते हैं कि 'राजा हमारा दास है।' ॥60॥
 
Just like people play with a bird tied to a string, similarly they too want to play with the king and keep telling the common people that 'the king is our slave.' ॥ 60॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)