Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.56.6: यदि कोई राजा आसक्तिवश प्राचीन राजाओं द्वारा अपनाए गए राजधर्म के पालन में प्रमाद करेगा, तो संसार की व्यवस्था बिगड़ जाएगी और सभी लोग दुःखी हो जाएँगे ॥6॥ | mahabharat अध्याय 12.56: युधिष्ठिरके पूछनेपर भीष्मके द्वारा राजधर्मका वर्णन, राजाके लिये पुरुषार्थ और सत्यकी आवश्यकता, ब्राह्मणोंकी अदण्डनीयता तथा राजाकी परिहासशीलता और मृदुतासे प्रकट होनेवाले दोष । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्र चेत् सम्प्रमुह्येत धर्मे राजर्षिसेविते।
लोकस्य संस्था न भवेत् सर्वं च व्याकुलीभवेत्॥ ६॥
अनुवाद
यदि कोई राजा आसक्तिवश प्राचीन राजाओं द्वारा अपनाए गए राजधर्म के पालन में प्रमाद करेगा, तो संसार की व्यवस्था बिगड़ जाएगी और सभी लोग दुःखी हो जाएँगे ॥6॥
If a king, out of attachment, becomes negligent in following the royal duty followed by the ancient kings, then the order of the world would be disrupted and everyone would become unhappy. ॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥