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mahabharat 12.56.51: राज्य के शासक राजा को कोसते हैं और उस पर क्रोधित होते हैं; रिश्वत लेकर और छल करके वे राजा के कार्यों में बाधा डालते हैं ॥ 51॥   |   mahabharat अध्याय 12.56: युधिष्ठिरके पूछनेपर भीष्मके द्वारा राजधर्मका वर्णन, राजाके लिये पुरुषार्थ और सत्यकी आवश्यकता, ब्राह्मणोंकी अदण्डनीयता तथा राजाकी परिहासशीलता और मृदुतासे प्रकट होनेवाले दोष   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 56: युधिष्ठिरके पूछनेपर भीष्मके द्वारा राजधर्मका वर्णन, राजाके लिये पुरुषार्थ और सत्यकी आवश्यकता, ब्राह्मणोंकी अदण्डनीयता तथा राजाकी परिहासशीलता और मृदुतासे प्रकट होनेवाले दोष  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  12.56.51 
क्रुश्यन्ति परिदीप्यन्ति भूमिपायाधितिष्ठते।
उत्कोचैर्वञ्चनाभिश्च कार्याण्यनुविहन्ति च॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
राज्य के शासक राजा को कोसते हैं और उस पर क्रोधित होते हैं; रिश्वत लेकर और छल करके वे राजा के कार्यों में बाधा डालते हैं ॥ 51॥
 
The rulers of the kingdom curse the king and become furious against him; by taking bribes and cheating they obstruct the king's activities. ॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)