Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.56.50: जब उन्हें किसी काम के लिए भेजा जाता है, तो वे उसकी सफलता में संदेह उत्पन्न करते हैं। वे राजा की गुप्त भूलों को भी सबके सामने उजागर कर देते हैं। वे ऐसी वस्तुएँ माँगते हैं जो नहीं माँगनी चाहिए और राजा के लिए रखी हुई भोजन सामग्री स्वयं खा लेते हैं ॥50॥ | mahabharat अध्याय 12.56: युधिष्ठिरके पूछनेपर भीष्मके द्वारा राजधर्मका वर्णन, राजाके लिये पुरुषार्थ और सत्यकी आवश्यकता, ब्राह्मणोंकी अदण्डनीयता तथा राजाकी परिहासशीलता और मृदुतासे प्रकट होनेवाले दोष । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब उन्हें किसी काम के लिए भेजा जाता है, तो वे उसकी सफलता में संदेह उत्पन्न करते हैं। वे राजा की गुप्त भूलों को भी सबके सामने उजागर कर देते हैं। वे ऐसी वस्तुएँ माँगते हैं जो नहीं माँगनी चाहिए और राजा के लिए रखी हुई भोजन सामग्री स्वयं खा लेते हैं ॥50॥
When they are sent for any work, they create doubts about its success. They also bring out the secret mistakes of the king in front of everyone. They ask for things which should not be asked for and eat the food items kept for the king. ॥ 50॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥