प्रत्यक्षेणानुमानेन तथौपम्यागमैरपि।
परीक्ष्यास्ते महाराज स्वे परे चैव नित्यश:॥ ४१॥
अनुवाद
महाराज! प्रत्यक्ष, अनुमान, सादृश्य और शास्त्र - इन चार प्रमाणों के द्वारा अपने और पराये की पहचान करने का सदैव प्रयत्न करना चाहिए ॥ 41॥
Maharaj! One should always try to identify one's own and others with the help of these four proofs - direct perception, inference, analogy and the scriptures. ॥ 41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥