Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.56.4: हे कुरुपुत्र! राजा के कर्तव्यों में धर्म, अर्थ और काम सम्मिलित हैं, और यह स्पष्ट है कि मोक्ष का पूर्ण कर्तव्य भी राजाओं के कर्तव्य में सम्मिलित है।॥4॥ | mahabharat अध्याय 12.56: युधिष्ठिरके पूछनेपर भीष्मके द्वारा राजधर्मका वर्णन, राजाके लिये पुरुषार्थ और सत्यकी आवश्यकता, ब्राह्मणोंकी अदण्डनीयता तथा राजाकी परिहासशीलता और मृदुतासे प्रकट होनेवाले दोष । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्रिवर्गो हि समासक्तो राजधर्मेषु कौरव।
मोक्षधर्मश्च विस्पष्ट: सकलोऽत्र समाहित:॥ ४॥
अनुवाद
हे कुरुपुत्र! राजा के कर्तव्यों में धर्म, अर्थ और काम सम्मिलित हैं, और यह स्पष्ट है कि मोक्ष का पूर्ण कर्तव्य भी राजाओं के कर्तव्य में सम्मिलित है।॥4॥
O son of Kuru! The duties of a king include Dharma, Artha and Kama, and it is clear that the complete duty of Moksha (liberation) is also included in the duty of kings. ॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥