Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.56.28: तात! नरेश्वर! इस विषय पर दो श्लोक प्रसिद्ध हैं, जो प्राचीन काल में महर्षि शुक्राचार्य द्वारा गाये गए थे। महाराज! आप उन दो श्लोकों को एकाग्रचित्त होकर सुनें। 28॥ | mahabharat अध्याय 12.56: युधिष्ठिरके पूछनेपर भीष्मके द्वारा राजधर्मका वर्णन, राजाके लिये पुरुषार्थ और सत्यकी आवश्यकता, ब्राह्मणोंकी अदण्डनीयता तथा राजाकी परिहासशीलता और मृदुतासे प्रकट होनेवाले दोष । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्लोकौ चोशनसा गीतौ पुरा तात महर्षिणा।
तौ निबोध महाराज त्वमेकाग्रमना नृप॥ २८॥
अनुवाद
तात! नरेश्वर! इस विषय पर दो श्लोक प्रसिद्ध हैं, जो प्राचीन काल में महर्षि शुक्राचार्य द्वारा गाये गए थे। महाराज! आप उन दो श्लोकों को एकाग्रचित्त होकर सुनें। 28॥
Tat! Nareshwar! Two verses on this subject are famous, which were sung by Maharishi Shukracharya in ancient times. Maharaj! You listen to those two verses with concentration. 28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥