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mahabharat 12.56.22: हे पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर, दानवीरों में श्रेष्ठ! आपको ब्राह्मणों को कभी दण्ड नहीं देना चाहिए; क्योंकि ब्राह्मण संसार में सर्वश्रेष्ठ प्राणी हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.56: युधिष्ठिरके पूछनेपर भीष्मके द्वारा राजधर्मका वर्णन, राजाके लिये पुरुषार्थ और सत्यकी आवश्यकता, ब्राह्मणोंकी अदण्डनीयता तथा राजाकी परिहासशीलता और मृदुतासे प्रकट होनेवाले दोष   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 56: युधिष्ठिरके पूछनेपर भीष्मके द्वारा राजधर्मका वर्णन, राजाके लिये पुरुषार्थ और सत्यकी आवश्यकता, ब्राह्मणोंकी अदण्डनीयता तथा राजाकी परिहासशीलता और मृदुतासे प्रकट होनेवाले दोष  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.56.22 
अदण्ड्याश्चैव ते पुत्र विप्राश्च ददतां वर।
भूतमेतत् परं लोके ब्राह्मणो नाम पाण्डव॥ २२॥
 
 
अनुवाद
हे पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर, दानवीरों में श्रेष्ठ! आपको ब्राह्मणों को कभी दण्ड नहीं देना चाहिए; क्योंकि ब्राह्मण संसार में सर्वश्रेष्ठ प्राणी हैं।
 
O son of Pandu, Yudhishthira, the best of donors! You should never punish Brahmins; because Brahmins are the best beings in the world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)