Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.56.20: हे कुरुपुत्र! तुम्हें अपने सभी कार्यों में सरलता और सौम्यता अपनानी चाहिए, किन्तु आचार-विचार के विश्लेषण से ज्ञात होता है कि अपने दोष, अपनी सलाह और अपने कार्य-कौशल - इन तीन बातों को गुप्त रखने में सरलता अपनाना उचित नहीं है। | mahabharat अध्याय 12.56: युधिष्ठिरके पूछनेपर भीष्मके द्वारा राजधर्मका वर्णन, राजाके लिये पुरुषार्थ और सत्यकी आवश्यकता, ब्राह्मणोंकी अदण्डनीयता तथा राजाकी परिहासशीलता और मृदुतासे प्रकट होनेवाले दोष । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे कुरुपुत्र! तुम्हें अपने सभी कार्यों में सरलता और सौम्यता अपनानी चाहिए, किन्तु आचार-विचार के विश्लेषण से ज्ञात होता है कि अपने दोष, अपनी सलाह और अपने कार्य-कौशल - इन तीन बातों को गुप्त रखने में सरलता अपनाना उचित नहीं है।
O son of Kuru! You should adopt simplicity and gentleness in all your actions, but from the analysis of ethics, it is known that it is not right to adopt simplicity in keeping these three things secret - your flaws, your advice and your skill in action.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥