Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.56.18: राजेन्द्र! जैसे मुनियों के लिए भी सत्य परम धन है, वैसे ही राजाओं के लिए भी प्रजा में श्रद्धा उत्पन्न करने के लिए सत्य से बढ़कर कोई साधन नहीं है॥18॥ | mahabharat अध्याय 12.56: युधिष्ठिरके पूछनेपर भीष्मके द्वारा राजधर्मका वर्णन, राजाके लिये पुरुषार्थ और सत्यकी आवश्यकता, ब्राह्मणोंकी अदण्डनीयता तथा राजाकी परिहासशीलता और मृदुतासे प्रकट होनेवाले दोष । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजेन्द्र! जैसे मुनियों के लिए भी सत्य परम धन है, वैसे ही राजाओं के लिए भी प्रजा में श्रद्धा उत्पन्न करने के लिए सत्य से बढ़कर कोई साधन नहीं है॥18॥
Rajendra! Truth is the ultimate wealth for sages as well. Similarly, for kings, there is no better means than truth to inspire faith in the subjects.॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥