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mahabharat 12.56.11: युधिष्ठिर, अब मुझसे राजा के कर्तव्यों को पूर्णतः सुनो और जो कुछ तुम सुनना चाहते हो, उसे भी सुनो।   |   mahabharat अध्याय 12.56: युधिष्ठिरके पूछनेपर भीष्मके द्वारा राजधर्मका वर्णन, राजाके लिये पुरुषार्थ और सत्यकी आवश्यकता, ब्राह्मणोंकी अदण्डनीयता तथा राजाकी परिहासशीलता और मृदुतासे प्रकट होनेवाले दोष   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 56: युधिष्ठिरके पूछनेपर भीष्मके द्वारा राजधर्मका वर्णन, राजाके लिये पुरुषार्थ और सत्यकी आवश्यकता, ब्राह्मणोंकी अदण्डनीयता तथा राजाकी परिहासशीलता और मृदुतासे प्रकट होनेवाले दोष  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.56.11 
शृणु कात्‍स्‍न्‍‍‍र्येन मत्तस्त्वं राजधर्मान् युधिष्ठिर।
निरुच्यमानान् नियतो यच्चान्यदपि वाञ्छसि॥ ११॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर, अब मुझसे राजा के कर्तव्यों को पूर्णतः सुनो और जो कुछ तुम सुनना चाहते हो, उसे भी सुनो।
 
Yudhishthira, now listen to me fully and completely explain the duties of a king and whatever else you wish to hear, listen to that.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)