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श्लोक 12.55.22  |
तमुवाचाथ गाङ्गेयो वृषभ: सर्वधन्विनाम्।
मां पृच्छ तात विश्रब्धं मा भैस्त्वं कुरुसत्तम॥ २२॥ |
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| अनुवाद |
| तत्पश्चात् समस्त धनुर्धरों में श्रेष्ठ गंगानन्दन भीष्मजी ने उनसे कहा - 'तात! मैं इस समय स्वस्थ हूँ, तुम निर्भय होकर मुझसे प्रश्न पूछ सकते हो। कुरुश्रेष्ठ! तुम डरो मत।' |
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| After that, Ganganandan Bhishmaji, the best among all the archers, said to him - 'Tat! I am healthy at the moment, you can ask me questions without fear. Kurushrestha! Don't be afraid.' |
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इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि युधिष्ठिराश्वासने पञ्चपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें युधिष्ठिरको आश्वासनविषयक पचपनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५५॥
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