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mahabharat 12.54.9: भीष्मजी प्राण त्यागना चाहते हैं, इसलिए तुम सब लोग उनसे अपनी चिंता पूछो, क्योंकि वे चारों वर्णों के सम्पूर्ण और विविध धर्मों को जानते हैं॥9॥   |   mahabharat अध्याय 12.54: भगवान् श्रीकृष्ण और भीष्मजीकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 54: भगवान् श्रीकृष्ण और भीष्मजीकी बातचीत  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.54.9 
अयं प्राणानुत्सिसृक्षुस्तं सर्वेऽभ्यनुपृच्छत।
कृत्स्नान् हि विविधान् धर्मांश्चातुर्वर्ण्यस्य वेत्त्ययम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी प्राण त्यागना चाहते हैं, इसलिए तुम सब लोग उनसे अपनी चिंता पूछो, क्योंकि वे चारों वर्णों के सम्पूर्ण और विविध धर्मों को जानते हैं॥9॥
 
'Bhishmaji wishes to give up his life, therefore all of you should ask him about your concerns because he knows the complete and various Dharmas of the four Varnas.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)