श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 54: भगवान् श्रीकृष्ण और भीष्मजीकी बातचीत  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  12.54.33 
राजानो हतशिष्टास्त्वां राजन्नभित आसते।
धर्माननुयुयुुक्षन्तस्तेभ्य: प्रब्रूहि भारत॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! हे राजाओं के स्वामी! ये राजा मरकर भी जीवित बचे हुए हैं, जो धर्म के विषय में जिज्ञासा लेकर आपके सम्मुख बैठे हैं। आप उन सबको धर्म का उपदेश दीजिए॥ 33॥
 
Bharat! O Lord of kings! These kings who survived death are sitting in front of you with curiosity about religion. Please preach religion to all of them.॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)