Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.54.21: चारों आश्रमों के धर्मों का सार भी मेरे हृदय में प्रकट हो रहा है। केशव! इस समय मैं समस्त राजधर्मों को भी भली-भाँति जानता हूँ।॥21॥ | mahabharat अध्याय 12.54: भगवान् श्रीकृष्ण और भीष्मजीकी बातचीत । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
चतुर्ष्वाश्रमधर्मेषु योऽर्थ: स च हृदि स्थित:।
राजधर्मांश्च सकलानवगच्छामि केशव॥ २१॥
अनुवाद
चारों आश्रमों के धर्मों का सार भी मेरे हृदय में प्रकट हो रहा है। केशव! इस समय मैं समस्त राजधर्मों को भी भली-भाँति जानता हूँ।॥21॥
The essence of the religions of the four ashrams is also being revealed in my heart. Keshav! At this time I also know all the Rajdharmas very well. ॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥