श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 54: भगवान् श्रीकृष्ण और भीष्मजीकी बातचीत  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.54.20 
शिष्टैश्च धर्मो य: प्रोक्त: स च मे हृदि वर्तते।
देशजातिकुलानां च धर्मज्ञोऽस्मि जनार्दन॥ २०॥
 
 
अनुवाद
जनार्दन! सज्जन पुरुषों द्वारा प्रचारित धर्म मेरे हृदय में भी प्रकाशित हो रहा है। इस समय मुझे देश, जाति और कुल के धर्मों का पूर्ण ज्ञान है।
 
Janardan! The religion preached by the noble men is also shining in my heart. At this time I have full knowledge of the religions of the country, caste and clan.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)