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mahabharat 12.54.16: हे निष्पाप भीष्म! क्या तुम्हारे अन्तःकरण में सब प्रकार का ज्ञान प्रकट हो रहा है? क्या तुम्हारे हृदय में कोई पश्चाताप नहीं है? क्या तुम्हारा मन व्याकुल नहीं हो रहा है?॥16॥   |   mahabharat अध्याय 12.54: भगवान् श्रीकृष्ण और भीष्मजीकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.54.16 
कच्चिज्ज्ञानानि सर्वाणि प्रतिभान्ति च तेऽनघ।
न ग्लायते च हृदयं न च ते व्याकुलं मन:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे निष्पाप भीष्म! क्या तुम्हारे अन्तःकरण में सब प्रकार का ज्ञान प्रकट हो रहा है? क्या तुम्हारे हृदय में कोई पश्चाताप नहीं है? क्या तुम्हारा मन व्याकुल नहीं हो रहा है?॥16॥
 
Sinless Bhishma! Are all kinds of knowledge being revealed in your conscience? Is there no remorse in your heart? Is your mind not getting agitated?॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)