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mahabharat 12.53.9: इसके बाद भगवान ने शुभ वस्तुओं का स्पर्श करके स्वच्छ दर्पण में अपना स्वरूप देखा और सत्य वचन बोले- ॥9॥   |   mahabharat अध्याय 12.53: भगवान् श्रीकृष्णकी प्रातश्चर्या, सात्यकिद्वारा उनका संदेश पाकर भाइयोंसहित युधिष्ठिरका उन्हींके साथ कुरुक्षेत्रमें पधारना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 53: भगवान् श्रीकृष्णकी प्रातश्चर्या, सात्यकिद्वारा उनका संदेश पाकर भाइयोंसहित युधिष्ठिरका उन्हींके साथ कुरुक्षेत्रमें पधारना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.53.9 
मङ्गलालम्भनं कृत्वा आत्मानमवलोक्य च।
आदर्शे विमले कृष्णस्तत: सात्यकिमब्रवीत्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद भगवान ने शुभ वस्तुओं का स्पर्श करके स्वच्छ दर्पण में अपना स्वरूप देखा और सत्य वचन बोले- ॥9॥
 
After this, after touching the auspicious objects, God saw His form in the clean mirror and said the truth - ॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)