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mahabharat 12.53.6: तत्पश्चात राजा युधिष्ठिर के महल से मधुर, मंगलमय वाणी और बाजे की ध्वनि भी प्रकट होने लगी ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 12.53: भगवान् श्रीकृष्णकी प्रातश्चर्या, सात्यकिद्वारा उनका संदेश पाकर भाइयोंसहित युधिष्ठिरका उन्हींके साथ कुरुक्षेत्रमें पधारना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 53: भगवान् श्रीकृष्णकी प्रातश्चर्या, सात्यकिद्वारा उनका संदेश पाकर भाइयोंसहित युधिष्ठिरका उन्हींके साथ कुरुक्षेत्रमें पधारना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.53.6 
ततो युधिष्ठिरस्यापि राज्ञो मङ्गलसंहिता:।
उच्चेरुर्मधुरा वाचो गीतवादित्रनि:स्वना:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात राजा युधिष्ठिर के महल से मधुर, मंगलमय वाणी और बाजे की ध्वनि भी प्रकट होने लगी ॥6॥
 
After that, sweet, auspicious speech and sound of musical instruments also started appearing from the palace of King Yudhishthir. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)