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शरतल्पे शयानं तमादित्यं पतितं यथा।
स ददर्श महाबाहुं भयाच्चागतसाध्वस:॥ २८॥
अनुवाद
बाणों की शय्या पर लेटे हुए महाबली भीष्म ऐसे लग रहे थे मानो सूर्य आकाश से पृथ्वी पर गिर पड़े हों। युधिष्ठिर ने उन्हें उस अवस्था में देखा। उस समय वे भयभीत हो गए।
The mighty Bhishma, lying on a bed of arrows, looked as if the Sun had fallen from the sky to the earth. Yudhishthira saw him in that state. At that time he was terrified.
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि भीष्माभिगमने त्रिपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें युधिष्ठिर आदिका भीष्मके समीप गमनविषयक तिरपनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥