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mahabharat 12.53.27: जैसे चन्द्रमा तारों से घिरा हुआ हो, वैसे ही राजा युधिष्ठिर अपने भाइयों से घिरे हुए गंगानन्दन भीष्म के पास गए, मानो इन्द्रदेव ब्रह्माजी के पास आ गए हों॥27॥   |   mahabharat अध्याय 12.53: भगवान् श्रीकृष्णकी प्रातश्चर्या, सात्यकिद्वारा उनका संदेश पाकर भाइयोंसहित युधिष्ठिरका उन्हींके साथ कुरुक्षेत्रमें पधारना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 53: भगवान् श्रीकृष्णकी प्रातश्चर्या, सात्यकिद्वारा उनका संदेश पाकर भाइयोंसहित युधिष्ठिरका उन्हींके साथ कुरुक्षेत्रमें पधारना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  12.53.27 
स तै: परिवृतो राजा नक्षत्रैरिव चन्द्रमा:।
अभ्याजगाम गाङ्गेयं ब्रह्माणमिव वासव:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
जैसे चन्द्रमा तारों से घिरा हुआ हो, वैसे ही राजा युधिष्ठिर अपने भाइयों से घिरे हुए गंगानन्दन भीष्म के पास गए, मानो इन्द्रदेव ब्रह्माजी के पास आ गए हों॥27॥
 
Like the moon surrounded by stars, King Yudhishthir, surrounded by his brothers, went near Ganganandan Bhishma, as if Lord Indra had come near Lord Brahma. 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)