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mahabharat 12.53.24-25h: तत्पश्चात् वे सब उस स्थान पर गए जहाँ महाबली भीष्म बाणों की शय्या पर शयन कर रहे थे। जैसे देवताओं से घिरे हुए ब्रह्मा जी शोभायमान होते हैं, वैसे ही महर्षियों से घिरे हुए भीष्म जी भी शोभायमान थे।   |   mahabharat अध्याय 12.53: भगवान् श्रीकृष्णकी प्रातश्चर्या, सात्यकिद्वारा उनका संदेश पाकर भाइयोंसहित युधिष्ठिरका उन्हींके साथ कुरुक्षेत्रमें पधारना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 53: भगवान् श्रीकृष्णकी प्रातश्चर्या, सात्यकिद्वारा उनका संदेश पाकर भाइयोंसहित युधिष्ठिरका उन्हींके साथ कुरुक्षेत्रमें पधारना  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  12.53.24-25h 
ततो ययुर्यत्र भीष्म: शरतल्पगत: प्रभु:॥ २४॥
आस्ते महर्षिभि: सार्धं ब्रह्मा देवगणैर्यथा।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वे सब उस स्थान पर गए जहाँ महाबली भीष्म बाणों की शय्या पर शयन कर रहे थे। जैसे देवताओं से घिरे हुए ब्रह्मा जी शोभायमान होते हैं, वैसे ही महर्षियों से घिरे हुए भीष्म जी भी शोभायमान थे।
 
Thereafter all of them went to the place where the mighty Bhishma was sleeping on a bed of arrows. Just as Brahma looks beautiful surrounded by gods, similarly Bhishma looked beautiful surrounded by great sages.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)