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mahabharat 12.53.23-24h: उन घोड़ों का बल और वेग महान था। वे ऐसे उड़ रहे थे मानो आकाश को पी रहे हों और कुछ ही समय में वे सर्वधर्म की भूमि कुरुक्षेत्र में पहुँच गए।   |   mahabharat अध्याय 12.53: भगवान् श्रीकृष्णकी प्रातश्चर्या, सात्यकिद्वारा उनका संदेश पाकर भाइयोंसहित युधिष्ठिरका उन्हींके साथ कुरुक्षेत्रमें पधारना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 53: भगवान् श्रीकृष्णकी प्रातश्चर्या, सात्यकिद्वारा उनका संदेश पाकर भाइयोंसहित युधिष्ठिरका उन्हींके साथ कुरुक्षेत्रमें पधारना  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  12.53.23-24h 
ते ग्रसन्त इवाकाशं वेगवन्तो महाबला:॥ २३॥
क्षेत्रं धर्मस्य कृत्स्नस्य कुरुक्षेत्रमवातरन्।
 
 
अनुवाद
उन घोड़ों का बल और वेग महान था। वे ऐसे उड़ रहे थे मानो आकाश को पी रहे हों और कुछ ही समय में वे सर्वधर्म की भूमि कुरुक्षेत्र में पहुँच गए।
 
The strength and speed of those horses were great. They flew as if they were drinking the sky and in no time they reached the Kurukshetra, the land of all religion. 23 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)