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mahabharat 12.53.21-22h: दारुका वासुदेवनंदन ने भगवान कृष्ण के बलाहक, मेघपुष्प, शैब्य और सुग्रीव नामक घोड़ों को चलाया। 21 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.53: भगवान् श्रीकृष्णकी प्रातश्चर्या, सात्यकिद्वारा उनका संदेश पाकर भाइयोंसहित युधिष्ठिरका उन्हींके साथ कुरुक्षेत्रमें पधारना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 53: भगवान् श्रीकृष्णकी प्रातश्चर्या, सात्यकिद्वारा उनका संदेश पाकर भाइयोंसहित युधिष्ठिरका उन्हींके साथ कुरुक्षेत्रमें पधारना  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  12.53.21-22h 
बलाहकं मेघपुष्पं शैब्यं सुग्रीवमेव च॥ २१॥
दारुकश्चोदयामास वासुदेवस्य वाजिन:।
 
 
अनुवाद
दारुका वासुदेवनंदन ने भगवान कृष्ण के बलाहक, मेघपुष्प, शैब्य और सुग्रीव नामक घोड़ों को चलाया। 21 1/2॥
 
Daruka Vasudevanandan drove Lord Krishna's horses named Balahak, Meghpushap, Shaibya and Sugriva. 21 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)