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mahabharat 12.53.16-17h: कुन्तीनंदन! आज से गंगाकुमार भीष्मजी धर्म के गूढ़तम रहस्यों का उपदेश देंगे। इसलिए मैं वहाँ भिन्न-भिन्न रुचि रखने वाले सामान्य लोगों को एकत्रित नहीं करना चाहता।   |   mahabharat अध्याय 12.53: भगवान् श्रीकृष्णकी प्रातश्चर्या, सात्यकिद्वारा उनका संदेश पाकर भाइयोंसहित युधिष्ठिरका उन्हींके साथ कुरुक्षेत्रमें पधारना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 53: भगवान् श्रीकृष्णकी प्रातश्चर्या, सात्यकिद्वारा उनका संदेश पाकर भाइयोंसहित युधिष्ठिरका उन्हींके साथ कुरुक्षेत्रमें पधारना  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  12.53.16-17h 
अद्यप्रभृति गाङ्गेय: परं गुह्यं प्रवक्ष्यति॥ १६॥
अतो नेच्छामि कौन्तेय पृथग्जनसमागमम्।
 
 
अनुवाद
कुन्तीनंदन! आज से गंगाकुमार भीष्मजी धर्म के गूढ़तम रहस्यों का उपदेश देंगे। इसलिए मैं वहाँ भिन्न-भिन्न रुचि रखने वाले सामान्य लोगों को एकत्रित नहीं करना चाहता।
 
Kunti Nandan! From today Gangakumar Bhishmaji will preach the deepest secrets of religion. Therefore I do not want to gather the common people having different interests there. 16 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)