Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.53.14-16h: युधिष्ठिर ने कहा, "अद्वितीय तेज वाले अर्जुन! मेरा रथ तैयार करो। आज सैनिकों को हमारे साथ नहीं जाना चाहिए। केवल हमें ही जाना है। धनंजय! भीड़ बढ़ाकर धर्मात्माओं में श्रेष्ठ भीष्म को कष्ट देना उचित नहीं है। अतः आगे जाने वाले सैनिकों को भी जाने से मना कर देना चाहिए।" | mahabharat अध्याय 12.53: भगवान् श्रीकृष्णकी प्रातश्चर्या, सात्यकिद्वारा उनका संदेश पाकर भाइयोंसहित युधिष्ठिरका उन्हींके साथ कुरुक्षेत्रमें पधारना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर उवाच
युज्यतां मे रथवर: फाल्गुनाप्रतिमद्युते॥ १४॥
न सैनिकैश्च यातव्यं यास्यामो वयमेव हि।
न च पीडयितव्यो मे भीष्मो धर्मभृतां वर:॥ १५॥
अत: पुर:सराश्चापि निवर्तन्तु धनंजय।
अनुवाद
युधिष्ठिर ने कहा, "अद्वितीय तेज वाले अर्जुन! मेरा रथ तैयार करो। आज सैनिकों को हमारे साथ नहीं जाना चाहिए। केवल हमें ही जाना है। धनंजय! भीड़ बढ़ाकर धर्मात्माओं में श्रेष्ठ भीष्म को कष्ट देना उचित नहीं है। अतः आगे जाने वाले सैनिकों को भी जाने से मना कर देना चाहिए।"
Yudhishthira said, "Arjun, of unmatched brilliance, get my chariot ready. Today the soldiers should not go with us. Only we have to go. Dhananjaya! It is not right to trouble Bhishma, the best among the righteous, by increasing the crowd. Therefore, the soldiers going ahead should also be refused to go."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥