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शराभितापाद् व्यथितं मनो मे मधुसूदन।
गात्राणि चावसीदन्ति न च बुद्धि: प्रसीदति॥ ६॥
अनुवाद
मधुसूदन! इन बाणों की जलन से मुझे बड़ी पीड़ा हो रही है। पीड़ा के कारण मेरा सारा शरीर दुर्बल हो गया है और मेरा मन बिल्कुल भी काम नहीं कर रहा है।॥6॥
'Madhusudana! I am in great pain because of the burning sensation caused by these arrows. My whole body has become weak due to the pain and my mind is not functioning at all.॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥