Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.52.5: जो व्यक्ति इंद्रदेव को स्वर्गलोक की कथाएँ सुनाने का साहस कर सकता है, वही आपसे धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की बातें कह सकता है। ॥5॥ | mahabharat अध्याय 12.52: भीष्मका अपनी असमर्थता प्रकट करना, भगवान् का उन्हें वर देना तथा ऋषियों एवं पाण्डवोंका दूसरे दिन आनेका संकेत करके वहाँसे विदा होकर अपने-अपने स्थानोंको जाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कथयेद् देवलोकं यो देवराजसमीपत:।
धर्मकामार्थमोक्षाणां सोऽर्थं ब्रूयात् तवाग्रत:॥ ५॥
अनुवाद
जो व्यक्ति इंद्रदेव को स्वर्गलोक की कथाएँ सुनाने का साहस कर सकता है, वही आपसे धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की बातें कह सकता है। ॥5॥
'Only he who can muster the courage to narrate the tales of the heavenly realm to Lord Indra can speak to you about Dharma, Artha, Kama and Moksha. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥